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भयावह हादसे के 2 साल बाद भी गुजरात पर्यटन की वेबसाइट ‘मोरबी पुल’ को कर रहा प्रमोट

| Updated: February 25, 2025 11:57

अहमदाबाद: मोरबी पुल हादसे को दो साल से अधिक समय बीत चुका है, जिसमें 135 लोगों की जान गई थी, लेकिन गुजरात पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट अब भी इस दुर्भाग्यपूर्ण झूलतो पुल (झूलता पुल) को “विक्टोरियन युग का वास्तुशिल्प चमत्कार” बताकर प्रमोट कर रही है। इस असंवेदनशीलता को लेकर स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है, जो इसे एक गंभीर लापरवाही मानते हैं।

कई लोगों का मानना है कि इस स्थान को पर्यटक स्थल के बजाय एक स्मारक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि मृतकों को श्रद्धांजलि दी जा सके। पर्यटन वेबसाइट पर मोरबी को 19वीं सदी के यूरोप जैसा बताते हुए “संकरी पत्थर की गलियों और ऐतिहासिक इमारतों” का उल्लेख किया गया है। पुल को “विक्टोरियन लंदन की याद दिलाने वाला” और “उस युग का कलात्मक और तकनीकी चमत्कार” बताया गया है। इस विवरण के साथ पुल की 2022 की दुर्घटना से पहले की तस्वीर भी प्रकाशित की गई है।

हालांकि, इस प्रचार सामग्री पर तीखी आलोचना हो रही है, क्योंकि यह 31 अक्टूबर 2022 को दिवाली अवकाश के दौरान हुई त्रासदी की अनदेखी करता है। ब्रिटिश काल का यह झूला पुल, जो मच्छू नदी पर स्थित था, अचानक 200 से 250 लोगों के भार से टूट गया था। इस भयावह हादसे में 135 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 54 बच्चे शामिल थे, जिनमें से 33 की उम्र 10 साल या उससे कम थी।

पुल के मरम्मत, नवीनीकरण, रखरखाव और संचालन का ठेका ओरेवा ग्रुप को दिया गया था। कंपनी ने 24 अक्टूबर 2022 को इसे फिर से जनता के लिए खोल दिया, लेकिन संरचनात्मक खामियों के चलते यह हादसा हो गया। पुल का मलबा एक महीने से अधिक समय तक पड़ा रहा और आज तक वहां कोई नया पुल नहीं बनाया गया है।

पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग अब पर्यटन विभाग से इस भ्रामक विवरण को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थान को स्मारक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि मृतकों की याद को सहेजा जा सके, न कि इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में पेश किया जाए।

अपने चार परिजनों को खोने वाले पंकज अमृतिया ने अपनी कहा कि, “मेरा कार्यस्थल समाकंठा इलाके में है, और जब भी मैं इस स्थान से गुजरता हूं, मेरी भावनाएं काबू में नहीं रहतीं। मैं अक्सर रो पड़ता हूं। जहां मेरे अपने मरे, उसे पर्यटन स्थल की तरह दिखाना अस्वीकार्य है।”

टंकारा के एक एंबुलेंस ड्राइवर फिरोज सर्वादी, जिन्होंने हादसे की रात 80 से 90 शवों को अस्पताल पहुंचाया और 120 घायलों को स्थानांतरित किया, ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “झूलतो पुल का अध्याय उस रात ही समाप्त हो गया था। अब वहां कुछ भी नहीं बचा है। मैं आज भी उस रात की भयावहता को याद करता हूं—लोग बिना किसी गलती के मारे गए। यह दर्दनाक है कि सरकारी वेबसाइट अब भी इसे पर्यटन स्थल के रूप में दिखा रही है। सरकार को वहां एक स्मारक बनाना चाहिए।”

बीबीए के छात्र और पुलिस अधिकारी बनने की आकांक्षा रखने वाले मोहित परमार ने कोविड-19 के चलते पुल पर जाने से परहेज किया था, जिससे वे इस हादसे से बच गए। उन्होंने कहा, “यह पुल अब केवल मोरबी के लोगों की यादों में बचा है। इसका रास्ता बंद कर दिया गया है और कोई भी वहां नहीं जा सकता। सरकारी वेबसाइट पर इसका उल्लेख एक गंभीर गलती है, जिसे टाला जाना चाहिए था।”

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